चंबल का घड़ियाल पानी से निकलकर रेतीले किनारे पर धूप सेंकता है। मादा को अंडे देने के लिए भी किनारे की रेत चाहिए। इसलिए उसका आवास समझने में नदी का बहाव और उसके साथ बचा खुला तट, दोनों जरूरी हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान से जुड़े शोधकर्ताओं का तीन साल का अध्ययन इसी रिश्ते को आंकड़ों में देखता है।

दिसंबर 2025 में प्रकाशित शोध में 2017, 2018 और 2019 के सर्वे का विश्लेषण है। दल ने पाली से पंचनदा तक चंबल के लगभग 425 किलोमीटर और निचली पार्वती के करीब 60 किलोमीटर हिस्से में नाव से सर्वे किया। सर्दियों में दिन के समय धूप सेंकते घड़ियाल गिने गए; घोंसलों की निगरानी अलग दौरों में हुई।

संख्या बढ़ी, उम्र का अनुपात बदला

दर्ज घड़ियाल 2017 के 1,512 से बढ़कर 2019 में 1,857 हुए। घोंसले इसी अवधि में 402 से 486 पहुंचे। मगर कुल गिनती में हाल में अंडों से निकले बच्चों की हिस्सेदारी 5.8 प्रतिशत से घटकर 2.1 प्रतिशत रह गई। हर वर्ष वयस्कों का हिस्सा 60 प्रतिशत से ज्यादा था।

लेखकों ने छोटे बच्चों के कम दिखाई देने, मृत्यु और पर्यावरणीय बदलाव जैसी संभावनाएं बताईं। सर्वे से यह तय नहीं होता कि कमी का एकमात्र कारण क्या था। छोटे घड़ियाल छूट सकते हैं; इसलिए दिखाई दिए जीवों की संख्या को हर जीव की पूर्ण जनगणना मानना भी ठीक नहीं है।

रेत का किनारा क्या बदलता है

आवास के विश्लेषण में रेतीले तटों और घड़ियाल की मौजूदगी के बीच सकारात्मक संबंध मिला। मिट्टी और पत्थर वाले किनारों से संबंध उलटा था। अपेक्षाकृत उथले पानी वाले हिस्सों की ओर भी झुकाव दिखा। यह सर्दियों के धूप सेंकने के समय का परिणाम है; इससे मानसून या पूरे साल के व्यवहार की पूरी तस्वीर नहीं निकलती।

भारतीय वन्यजीव संस्थान के मध्यप्रदेश वाले चंबल अभयारण्य के 2022–23 प्रबंधन मूल्यांकन ने रेत व पत्थर खनन, चराई और सिंचाई की मांग से नदी-प्रवाह पर दबाव दर्ज किया। उसने आवश्यक बहाव बनाए रखने के लिए विभागों के बीच तालमेल और स्थानीय समुदायों की भागीदारी की सिफारिश की।

इस तरह संरक्षण का काम बड़े घड़ियालों की गिनती तक सीमित नहीं रहता। बच्चों का बचना, अंडे देने के लिए खुली रेत और सही समय पर पर्याप्त बहाव उस गिनती के पीछे की शर्तें हैं। अध्ययन की तस्वीर ऐतिहासिक है, लेकिन नदी के आवास को समझने का यह तरीका आज भी उपयोगी है।

मुख्य बातें

  • अध्ययन में 2017 से 2019 के बीच दिखे घड़ियाल 1,512 से 1,857 हुए।
  • रेतीले तटों से घड़ियाल की मौजूदगी का सकारात्मक संबंध मिला।
  • सर्वे सर्दियों के दिन में धूप सेंकते जीवों पर केंद्रित था; यह 2026 की आबादी नहीं है।

स्रोत और संदर्भ

  1. Ecology and Evolution / शर्मा एवं सहलेखक · Unraveling Population Trend of a Critically Endangered Freshwater Crocodylian, Gharial ↗10 दिसंबर 2025
  2. भारतीय वन्यजीव संस्थान / पर्यावरण मंत्रालय · Management Effectiveness Evaluation 2020–2025; National Chambal WLS MP, assessment 2022–23 ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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