इंदौर की मेट्रो अब शुरुआती छोटे हिस्से से आगे निकल आई है। 5 सितंबर 2026 को सुपर कॉरिडोर–3 से मालवीय नगर चौराहा तक करीब 11 किलोमीटर के हिस्से का उद्घाटन हुआ। इसमें 11 स्टेशन हैं। केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अनुसार, इसके जुड़ने से चालू नेटवर्क करीब 17 किलोमीटर और 16 स्टेशनों का हो गया है।

यह शहर के रोजमर्रा के सफर के लिए अहम विस्तार है। मेट्रो की उपयोगिता इस बात से बनती है कि घर, काम और बाजार के कितने करीब उसका स्टेशन पड़ता है। मालवीय नगर तक पहुँची लाइन अधिक इलाकों को रेल आधारित सार्वजनिक परिवहन से जोड़ती है। स्टेशन तक की अंतिम पैदल दूरी भी इसी सफर का हिस्सा है।

पहली ट्रेन से आगे की कहानी

नए हिस्से की अनुमानित लागत ₹2,850 करोड़ बताई गई है। अब तक खुले नेटवर्क की संयुक्त परियोजना लागत लगभग ₹4,370 करोड़ है। दोनों रकम अलग दायरे की हैं: पहली इस विस्तार की, दूसरी चालू नेटवर्क की।

इन पीली मेट्रो ट्रेनों के पीछे गुजरात का सावली कारखाना है। निर्माता अल्स्टॉम के जून 2025 के विवरण के अनुसार, इंदौर और भोपाल के संयुक्त आदेश में तीन डिब्बों वाली 52 ट्रेनें और उनका 15 वर्ष का रखरखाव शामिल है। इनमें 25 ट्रेनें इंदौर के लिए निर्धारित थीं।

ट्रेन के साथ सिग्नल प्रणाली भी इसी आपूर्ति का हिस्सा है। संचार आधारित ट्रेन नियंत्रण, यानी CBTC, ट्रेनों की आवाजाही को नियंत्रित करने में मदद करता है। निर्माता ने सिग्नल, नियंत्रण और दूरसंचार प्रणालियों के लिए सात वर्ष के रखरखाव का दायित्व बताया है। शहर में दिखती रेल के पीछे लंबे समय तक चलने वाली यह संचालन व्यवस्था भी जुड़ी है।

मुख्य बातें

  • विस्तार का उद्घाटन: 5 सितंबर 2026
  • नए हिस्से में 11 स्टेशन

स्रोत और संदर्भ

  1. पत्र सूचना कार्यालय · Indore Metro Priority Corridor–2 Inaugurated ↗5 सितंबर 2026
  2. अल्स्टॉम · Indore metro trains and CBTC signalling enter revenue service ↗2 जून 2025

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।

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