झाबुआ के भील समुदाय में पिथोरा की दीवार एक कथा कहती है। चित्र में घोड़ों की कतार दिखाई देती है, लेकिन उसका अर्थ रंग और आकृतियों से आगे जाता है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के विवरण में पिथोरा सम्मानित अनुष्ठान है और घोड़ों के चित्र देवों को अर्पित किए जाते हैं। पारंपरिक चित्रकार को लेखिन्द्र कहा गया है।

घोड़ों के आसपास सूर्य, चंद्रमा, पेड़, खेत, नदी, पशु, कीट और रोजमर्रा के काम जगह पाते हैं। दीवार पर समुदाय के विश्वास और जीवन के दृश्य एक साथ आते हैं। चित्र को पढ़ते हुए उसकी कथा और घर से जुड़े संदर्भ भी साथ जानना उपयोगी है।

घोड़े पर लौटे गीत और हँसी

IGNCA में दर्ज भील कथा के अनुसार धर्मी राजा के राज्य में लोग हँसना, गाना और नाचना भूल गए थे। पिथोरा कुंवर घोड़े पर देवी हिमाली हर्दा के पास गए और वहाँ से गीत, नृत्य और हँसी वापस लाए। यह समुदाय में कही जाने वाली कथा है, ऐतिहासिक घटना का दावा नहीं। पिथोरा के घोड़े इस तरह आकृति के साथ स्मृति और कथा भी सँजोते हैं।

गुजरात के विवरण में चित्र की सामग्री

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय का Incredible India पन्ना गुजरात की राठवा परंपरा का परिचय देता है। वहाँ भी घर की दीवार, अनुष्ठान और घोड़ों पर देवताओं तथा पूर्वजों की आकृतियाँ साथ आती हैं। उस विवरण में चित्रकार को लखारा कहा गया है।

इस राठवा उदाहरण में बाँस या बबूल की टहनियों से कूची बनाने और वनस्पतियों तथा खनिजों से रंग तैयार करने का उल्लेख है। रंगों में दूध और स्थानीय महुआ मदिरा के उपयोग का भी विवरण है। यह गुजरात के दस्तावेजित उदाहरण की सामग्री है; इसे झाबुआ के हर चित्रकार की एक जैसी विधि नहीं मानना चाहिए।

इन दोनों संस्थागत विवरणों को साथ पढ़ने से पिथोरा को समझने का रास्ता मिलता है: घोड़े पहचान बनाते हैं, लेकिन कलाकार, समुदाय, जगह और अवसर चित्र का पूरा संदर्भ देते हैं। संग्रहालय में दिखने वाला कोई चित्र भी तभी बेहतर समझ आता है जब उसके प्रदर्शन-स्थल और मूल परंपरा को अलग-अलग पहचाना जाए।

मुख्य बातें

  • पिथोरा घर की दीवार से जुड़ी अनुष्ठानिक चित्र-परंपरा है।
  • झाबुआ के भील विवरण में पारंपरिक चित्रकार को लेखिन्द्र कहा गया है।
  • गुजरात के राठवा चित्रण की सामग्री और विधि को उसके अपने क्षेत्रीय संदर्भ में समझना चाहिए।

स्रोत और संदर्भ

  1. Indira Gandhi National Centre for the Arts · The Bhils of Madhya Pradesh ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. पर्यटन मंत्रालय / Incredible India · Pithora: The enigmatic ritual of Pithora paintings — Gujarat Rathwa context ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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